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बहुत से लोग कहते हैं कि वे योग करना चाहते हैं। बहुत से लोग ये भी कहते हैं कि वे योग नहीं करते, और क्यों?

क्योंकि वे कहते हैं उन्हें फुर्सत नहीं। तो कैसे और कहाँ वे व्यस्त लोग योग करने के लिए समय निकालते हैं?

पहले पहल सुबह

जिस पर आप अपनी आँख खोलते हैं और जागृत हो जाते हैं वे पल सबसे सुन्दर पल हैं योग के लिए। खुद का अभिवादन करें, कितनी शक्तिशाली सकारात्मक आत्मा हैं आप। फिर उसका अभिवादन करें जो (भगवान) कभी सोता नहीं। 

 

भोजन के समय

भोजन करने से पहले, कुछ पल के लिए यह विचार करें कि भोजन मिलना भी सौभाग्य है और इस समझ से विचार करें कि किस तरह हमारे विचार भोजन को प्रभावित करते हैं। हम जो सोचते हैं, कर्म करते हैं और वही बनते हैं। इस तरह अपने भोजन को सकारात्मक विचारों से भरना, कृतज्ञता और करुणा से भरा अर्थात्‍ हम खुद भी इन अच्छी बातों को ग्रहण करते हैं।

 

सारे दिन में – ट्रैफिक कन्ट्रोल

हम सभी अपनी जिन्दगी के हाइवे में ड्राइवर हैं। हम किधर जा रहे हैं इसकी गहराई से जांच करना अच्छी बात होगी। जब हम सड़क पर गाड़ी चला रहे होते हैं तो हमें हर ट्रैफिक लाइट पर रुकना पड़ता है, तो संभवत: हम इन क्षणों का योगदान में उपयोग कर सकते हैं। और इसी तरह, बीच-बीच में अपने विचारों को रोक कर उसकी जांच कर सकते हैं और एक सकारात्मक परिवर्तन की विधि को अपनाते हुए अपने मन को तटस्थ कर सकते हैं।

इस तरह के छोटे-छोटे अन्तराज में शान्ति का अभ्यास करते रहने से हम अपनी विचारधारा पर पुन: ध्यान केन्द्रित कर सकते हैं। यह हमारे मन को सकारात्मक दिशा में जाने में मदद करता है। यह अभ्यास करने से हम पायेंगे कि हमारा दिन शान्ति से चल रहा है क्योंकि ट्राफिक कन्ट्रोल का समय हमें सन्तुलित विचार रखने में मदद करता है।

 

रात्रि में

रात्रि का समय सोने से पूर्व अन्तिम योगाभ्यास बहुत अच्छा है। अपने लिए ये थोड़ा सा समय निश्चित करें, शान्त होकर खुद के साथ बैठें, सारे दिन का पुनरावलोकन करें कि आज क्या अच्छा किया और कल के दिन क्या नया कर सकते हैं। सारे दिन की बातें बन्द करते हुए उसे मन से बाहर निकाल दें। इस तरह अपने दिन का समापन करते हुए, आप बिना परेशानी के शान्ति पूर्वक सो सकें। 

 

कभी भी

जब कभी भी आप अपने को चिन्तित अवस्था में पाये वा निर्णय न ले पाने की स्थिति में पायें, उसी समय आप अपने अन्दर जायें और प्रति उत्तर का इन्तजार करें।

जब आप अपने को कृतज्ञता और खुशी में पाते हैं तो प्रभु को जरूर बतायें। यही वो समय है जब हम निराशा, अकेले थके हुए या फिर जब खुश, आशावादी और ऊपर उठे हुए होते हैं तभी अपनी शक्ति से नकारात्मक बातों को ठीक करते हुए सकारात्मकता को आभूषित करते हुए आनन्द का अनुभव करते हैं। इसलिए जो वक्त निकले उसे योगाभ्यास में सफल करें।