वेब कॉंटेंट डिसप्ले वेब कॉंटेंट डिसप्ले

यहाँ पर घर पर हर रोज स्थितियों से निपटने के लिए आध्यात्मिक शक्ति का उपयोग करने के कुछ उदाहरण हैं।

सामना करने की शक्ति द्वारा भावनाओं पर नियंत्रण पाना

मेरा भाई मुझे पागल कर रहा था। उसे हर सप्ताह हाथ में पैसे चाहिए। हर बार की तरह इस बार भी वैसा ही था, लेकिन मेरे योगाभ्यास का हमारे रिश्ते पर प्रभाव पड़ने लगा था। उसके आग्रह करने पर मैं एक पल के लिए रुकी, मैंने उसे कहा मैं उसे देना चाहूंगी लेकिन इस महीने मेरे खर्चे भी थोड़ा ज्यादा है। मैंने सोचा कि जैसे कोई दरवाजे को मैं जितना आगे करूँगी मैं उतना ही देख पाऊंगी कि उसके पीछे क्या है। इसी तरह जितना मैं अपनी भावनाओं को तटस्थ रखूंगी उतना ही सामने वाले का भाव समझ पाऊँगी। यदि मैं अपने बचाव के लिए करूं तो ज्यादा से ज्यादा मेरे अहम को ही ठेस पहुंचेगी ना। पर अच्छी बात ये होगी कि मेरी इज्जत मेरे अपने हाथ रहेगी। उसे पैसे देकर अगली बार के लिए एक सीमा तय कर दी, उसने मेरे इस कदम का सम्मान किया।  - DS

प्लेन का टिकट रद्द हो जाने पर समाने की शक्ति का उपयोग करना

जहाज की उड़ान के कुछ मिनट पहले जैसे ही मैं अपना सामान लेकर एयरपोर्ट में चेक-इन-डेस्क पर पहुंची, मुझे मालुम हुआ कि गलती से मैं अपना पासपोर्ट सीट पर ही छोड़ आई, मेरी उड़ान छूट गई। उस टिकट पर उड़ान नहीं की जा सकती थी और मुझे पूरे 500$ की एक नई टिकट खरीदनी पड़ी। किसी को दोष नहीं दे सकते थे क्योंकि ये जीवन रूपी नाटक का एक दृश्य था। मैंने शान्त मन और चेहरे पर मुस्कराहट के साथ काफी का आनन्द लिया।

अपमानित होने पर प्रेम की शक्ति का उपयोग करना

एक सहकर्मी हमेशा मेरी पीठ पीछे मेरी बुराई दूसरों के सामने करता रहता था। पहले तो उसकी खामियों को गिनाते हुए मैं अपना बचाव और उससे बदला लेना चाहता था। लेकिन फिर मैंने महसूस किया कि ऐसा करना बात को और बिगाड़ देगा। मुझे इसे ठीक करने के लिए बेहतर तरीके का चयन करना चाहिए। पहले मैंने इस बात को अपने ऊपर लेना छोड़ दिया इसके बारे में इतना सोचना निराधार था, और मैंने एक शक्तिशाली उपाय का प्रयोग करने का निर्णय लिया। जो मुझे पहले भी काम में आई थी। मैंने देखा कि वो अपने आपसे ही संघर्ष कर रहा है और उसके प्रक्षेपित क्रोध का निशाना मुझे बनाया जा रहा था। मैं जब भी उसे देखता था या सोचता था, मैं अपने आपको कहता था कि "उससे जो ऊर्जा मैं पा रहा हूँ क्या उससे अच्छी और श्रेष्ठ ऊर्जा मैं दे सकता हूँ"? इससे कोई मतलब नहीं कि वो मुझे क्या दे रहा है लेकिन मैंने ठान ली मैं उसे प्रेम देने में खुद को रोकूंगा नहीं बल्कि और ज्यादा प्रेम व आदर दूंगा। कुछ ही हफ्ते के भीतर हमारे सम्बन्ध में परिवर्तन आ गया और उसका अपमानित करना बन्द हो गया। अब हमारा सब ठीक हो गया। -CW

तर्क-वितर्क की स्थिति में समाने की शक्ति का उपयोग

हाल ही में, मेरे पति ने बड़े बाजार में मुझे बहुत बुरा भला कहा और ऐसी जगह हमारे खुले वार्तालाप के लिए सही नहीं थी। सामान्यत ऐसे में मैं तनावपूर्ण प्रतिक्रिया देती थी, झल्ला उठती थी और उनसे कई दिनों तक बात नहीं करती थी। पर इस बार मैं समाने की शक्ति का अभ्यास कर रही थी। कितना भी दर्द भरा दृश्य आये मैं उसे बस जाने देने का अभ्यास कर रही थी। मुझे योगाभ्यास कराने वाली टीचर ने यही सिखाया था। इस बार मैं स्वयं से आश्चर्यचकित हो गई। पति के जज़बाती जाल से स्वयं को मुक्त पाया। उस पल मैं थोड़ा पीछे हटी, मन में संकल्प किया "मैं शान्त स्वरूप आत्मा हूँ, शान्ति मेरा निजी स्वभाव है"। इसी जागृति ने मुझे मुक्त कर आगे बढ़ने में और सकारात्मक बनने में सशक्त कर दिया। मैंने उनसे ये उम्मींद भी करना छोड़ दिया कि वो जल्द ही कभी मेरे साथ सलीके से पेश आयेंगे। मैंने इस उम्मींद को अपने ऊपर और हावी होने नहीं दिया। मैंने अपने कर्मों की पूरी जिम्मेदारी खुद पर ले ली। इस तरह मैं खुद को विमुक्त महसूस किया। - MS 

अचानक बदली गयी योजनाओं में समाने की शक्ति का प्रयोग

मैं बर्तन धोने का कार्य पूरा करके फुटबॉल खेलने जाने ही वाला था कि मेरी पत्नि ने कहा कि उसकी तबियत ठीक नहीं है और वह स्कूल के अनुदान संग्रह समारोह में तीन घण्टे नहीं बोल पायेगी। एकदम से इस तरह का बदलाव और उसका निवेदन कि मैं उसकी जगह वहाँ बोलूं इस आकस्मिक कार्य में बंध जाने से मैं ठिठक गया। सुबह की मेरी सारी योजना चूर हो गई। मैं शान्ति से बैठा, थोड़ी गहरी सांस ली और अपनी योजनाओं में फेर-बदल की। मैंने कुछ अन्य माता-पिताओं को फोन कर मेरी पत्नि की जगह बोलने की लिए निवेदन किया परन्तु दुर्भाग्यवश कोई भी बोल नहीं सकता था। अत: मैं सम्भाषण करने को तैयार हुआ। अपनी मनोस्थिति को ठीक किया। मेरे दैनिक योगाभ्यास से मैंने सीखा कि बदलाव का विरोध करने के बजाए प्रवाह में चलना चाहिए। -NK

न्यारेपन की शक्ति से ट्रैफिक जाम का मुकाबला करना

अक्सर जब मैं काम पूरा कर घर की ओर जाता हूँ तो ट्रैफिक जाम में फंस जाता। किन्तु आज किसी तरह इन गाड़ियों की भीड़-भाड़ में मुझे एक अलग ही नज़ारा दिखाई दिया। मुझे अपने मेडिटेशन क्लास की एक अवधारणा याद आई कि "मैं इस सृष्टि रगंमचं पर साक्षी हो पार्ट बजाने वाली एक आत्मा हूँ" और कुछ ही क्षण में मैंने महसूस किया कि मेरी शान्ति, सन्तोष और स्थिरचित्त स्थिति से बढ़कर और कुछ नहीं है। जब भी मैं आत्म-अभिमानी अवस्था में आता हूँ मैं स्वत: ही धैर्यवान और सहनशील हो जाती हूँ। वास्तव में मैं सही या गलत के भेद से परे फिर न्यारी अवस्था में आ जाती हूँ। एक ड्राइवर के रूप में मैं इसे रोजाना अनुभव में लाता हूँ। गाड़ी चलाने का समय सबसे सही है इस अभ्यास के लिए और तभी हमारी वास्तविक मनोस्थिति का पता पड़ता है। बस, देह-भान से आत्म-अभिमानी बनना यही इसका आधार है। जब हम आत्म-अभिमानी होकर दुनिया को देखते हैं तो स्वत: सभी महत्वपूर्ण आध्यात्मिक शक्तियाँ दिखाई देने लगती हैं। -AP

प्रेम की शक्ति से एक भुलक्कड़ पड़ोसी को सम्भालना

एक डीवीडी रिकार्ड की दुकान जो दिन-रात ऊंची आवाज में संगीत बजाये रखता था, उसके बाजू में राजयोग केन्द्र चलाना चुनौती भरा था। मैंने उससे सिर्फ एक निवेदन किया था जब नुमाशाम का सामूहिक योग होता है उस समय वह आधे घण्टे के लिए आवाज कम कर दे। लेकिन वह अक्सर शराब और व्यसन के नशे में धुत रहने के कारण मेरे किये हुए निवेदन का पालन करना भूल जाता था। यह कोई उसका सोचा समझा इरादा नहीं था। वह मिलनसार व्यक्ति था लेकिन उदासी और संघर्ष भरा जीवन जी रहा था। कम से कम तीन महीने तक मुझे उसके दरवाजे पर जा खड़ा होना पड़ता था ताकि उसे याद आये कि अ‍ि हमारे योगाभ्यास का समय हो गया है इसलिए संगीत की ध्वनि कम कर दे। उसे कितना भी याद दिलाया, वार्तालाप का कोई फायदा नहीं हुआ, क्योंकि मैंने किसी भी तरह की कानूनी सहायता या नियम जो कि भोंपू जोर से चलाने के संदर्भ में होता है उसकी मदद लेना ठीक नहीं समझा।

फिर एक दिन एक प्यारी सी इटॉलियन माता जी जो हमारे पास आती थी उसने बहुत अच्छा उपाय सुझाया। इस कहानी को सुनने के बाद उसने एक ताजी उबली हुई और बेक की हुई लसाग्ना बर्तन में निकाल कर मुझे कहा कि ये उसे देकर आओ। यह सौगात देखकर उसका चेहरा खिल गया। क्या सचमुच मैं वो पहली इन्सान थी जो उसे अपनी पूरी जिन्दगी में प्रेम और परवाह की? ये बात उल्लेखनीय है कि उस शाम को मुझे उसके दरवाजे नहीं जाना पड़ा बल्कि वह हमारे दरवाजे आया ये देखने कि आवाज़ कम है या नहीं। प्रेम ने उसे जीत लिया – CW

पूरे समय देखभाल करना और सहनशक्ति का उपयोग करना

जब मेरी माँ कूल्हे की सर्जरी के बाद पहली बार अस्पताल से घर आई तो ये मेरे लिए चुनौती भरा काम था क्योंकि वे खुद को नियंत्रण नहीं कर पा रही थी, जैसा मैं या वो चाहती थी। अगर मैं उनकी परिस्थिति को न समझती तो यह मेरे सहन से बाहर हो जाता। उस समय यह समझ अथवा ज्ञान एक शक्ति बनकर कार्य कर रही थी। ज्ञान हमें सहजता से आपके आस-पास जो कुछ हो रहा है चाहे वो स्थान हो या प्यार सब बातों को स्वीकार करना आसान कर देता है, बजाए कि किसी डर से हम रहें। —DS

शोर करने वाले पड़ोसी के प्रति सहनशक्ति का उपयोग करना

रात के दो बजे पड़ोसी के तूफानी पार्टी ने मुझे चौंका दिया। मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि पार्टी मेरे शयनकक्ष में ही हो रही हो। पहले मुझे विचार आया कि पुलिस को फोन करूं फिर मुझे याद आया कि मैंने भी तो अपनी उम्र में कितने शोरगुल किये थे। मेरी जिन्दगी में एक प्रतिगामी की तरह आये इस कर्म के फल को मैं शान्त होकर सहन करने लगी। पार्टी जोरों से चलती रही और मैं इसे अपने कर्म का फल समझकर जल्द ही तंद्रा में चली गई। —CW

शान्ति की शक्ति से नही लगी नौकरी का सामना करना

मैं अपने नये नौकरी के कारण तनाव में था। बहुत सारी चीजे़ मुझ पर निर्भर कर रही थी। और मुझे संशय था कि ये सब मैं अच्छी तरह निभा पाऊंगा या नहीं। तनाव और संशय मेरे मन पर हावी होता जा रहा था और हालात इससे और बदतर। मेरी योग सिखाने वाली टीचर ने मुझे सिखाया था कि ऐसे हालातों में कैसे शान्ति से बैठकर इसका अवलोकन करना चाहिए। मुझे एक नवीन अन्तर जगत में जाने की जरूरत थी। मैंने संकल्प किया कि शान्त रहना ही मेरा अधिकार व कर्तव्य है। इसी शान्ति में मैंने पाया कि स्वतंत्रता ही मेरा मित्र है जो एक ही कदम की दूरी पर खड़ा है। बस एक तीव्र कदम से मैं वहाँ पहुंच गया, और मैं स्वतंत्र हो गया। —VB

एकाग्रता की शक्ति द्वारा स्‍कूल बस चलाना

स्‍कूली बच्‍चों के लिए बस चलाने के काम में कभी कभार उनकी शरारत से मेरा ध्‍यान हट जाता था कि मैं क्‍या महसूस कर रहा हूँ और मुझे कहॉं होना चाहिए। मुझे इस नौकरी में हमेशा एकाग्र होने की जरूरत होती है। इसलिए मुझे जब भी थोड़ा वक्‍त मिलता मैं मन से थोड़ा इससे अलग होकर मैं साफ-साफ देख सकता था कि ये सब परिस्थितियों रूपी सागर सिर्फ एक मनोरंजक सागर है। मैं खुद को इन लहरों के साथ खेलना और इसका आनन्‍द लेने की चुनौती देता था। इस तरह, बच्‍चों की चहक और चिंतित मात-पिताओं की चाहना आदि ऐसी घटनाओं के बीच मैं खुद को आजाद पंछी की तरह उड़ता रहता। - VB

शान्ति की शक्ति से परेशान करने वाले व्‍यवहार का सामना करना

घर में रिश्‍ते कुछ ठीक नहीं थे, सभी सैम के रवैरे और व्‍यवहार से परेशान थे। मुझे पता है सहनशक्ति की जरूरत थी लेकिन बिना किसी दबाव या नाराजगी के यह सब कैसे किया जाये? शान्ति में जाने से मैंनें स्‍वयं को सैम की भावनाओं और अनुभवों के प्रति सजग पाया। मुझमें दया और करुणा के भाव बढ़ने लगे जिससे उसकी करनी के प्रति सहज भाव से सहनशीलता आ गई। मुझे उसकी परिस्थितियों की छान-बीन करने की जरूरत नहीं पड़ी बल्कि मैं ध्‍यान के कारण जो यह शक्ति भर पाया इसके लिए उसका आभारी था। -VB

न्‍यारेपन की शक्ति द्वारा शरीर के भयंकर दर्द को सम्‍भालना

मेरे शरीर में हमेशा गठिया रोग के कारण भयंकर दर्द बना रहता था। योग के दौरान मैं अपने दर्दयुक्‍त शरीर से पूरी तरह से न्‍यारा होकर आत्‍म-अभिमानी स्थिति का गहरा अनुभव करता था। मैं अपने आपको आत्‍मा महसूस करते हुए ऊपर उस शक्ति द्वारा खिंचाव का अनुभव करता था। उस एक के द्वारा मैं सम्‍पूर्ण सुरक्षा और स्‍वास्‍थ्‍यकारक प्रेम का अनुभव करता था। वह प्‍यार का खिंचाव मुझे इस दुनिया में रहते हुए भी न्‍यारेपन के अनुभव में ले जाता था। परमात्‍मा से जो असीम प्‍यार का अनुभव मुझे होता था उसके कारण मैं शरीर से न्‍यारा हो सकता था। जब मैं शरीर से न्‍यारा होता था तब मैं नकारात्‍मक विचारों से उत्‍पन्‍न दुख और ध्‍यान बांटने वाली बातों से अपने आपको मुक्‍त कर पाता था। मैं अपने पुराने संस्‍कारों से अपने आपको अलग महसूस करता था। मेरे दिल में यह महसूसता होती वही एक परमशक्ति परमात्‍मा मुझे अपने आपको बदलने में मदद कर रहे हैं। वही मुझे दर्द का मुकाबला करने की हिम्‍मत दे रहा है। मेरा शारीरिक और मानसिक दर्द उन्‍हीं के कारण कम हो रहा है। -KJ

सामना करने की शक्ति द्वारा चिकित्‍सकीय, दुविधाजनक स्थिति का प्रबंधन

अपने जीवन में 3 बार ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़ा है जब मुझे गहरी सांस भरते हुए ऐसी चिकित्‍सकीय प्रक्रियाओं को जिन्‍हें मैं टाल सकता था, वे हैं नाक के लिए कोलोनास्‍कोपी, घुटना प्रत्‍यारोपण और आंखँ की सूक्ष्‍म शल्‍य चिकित्‍सा। पहले की दो घटनाओं को पार करना मंद हवा के झोंके के समान था लेकिन उसके बाद की कठिन फिजियोथेरेपी छोड़कर। लेकिन आंख की प्रक्रिया ने मेरी असली परीक्षा ली। जागरुक अवस्‍था में मेरी आंखों को केवल सुन्‍न किया जाता था और उसमें उपकरण घुसाये जाते थे। सब कुछ होते हुए मैं आसानी से देख पाता थी लेकिन कुछ महसूस नहीं होता था। ये सारी प्रक्रिया मुझे बहुत व्‍याकुल कर जाती थी। और जब चिमटे से मेरे आंखों की पुतलियों के मांस को खींचा जा रहा था तब मैं लगभग बेहोश हो जाता था। बेहोश होने से थोड़ा पहले जब मैंने योग द्वारा अपने आपका आह्वान किया तब मैं अपने मन को आत्‍माओं की दुनिया से ऊपर ले जाकर परमपिता परमात्‍मा के आरामदायक साथ का अनुभव करने लगा। इन तीनों ही घटनाओं के दौरान मेरा अटूट विश्‍वास, निष्‍ठा और हिम्‍मत ने मुझे स्थिर रहने और हर डर का सामना करने की शक्ति दी। तीसरी घटना के दौरान मैंने मदद के अनुभव के साथ उसके स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक सहयोग का भी अनुभव किया। -LE